New Study Warns of Devastating Global Consequences of an India-Pakistan Nuclear War - HINDI

नया अध्ययन भारत-पाकिस्तान परमाणु युद्ध के विनाशकारी वैश्विक परिणामों की चेतावनी देता है

डैनियल स्ट्रेन द्वारा *

बोल्डर, कोलोराडो, संयुक्त राज्य अमेरिका (IDN) - नए शोध के अनुसार भारत और पाकिस्तान के मध्य का  परमाणु युद्ध, एक सप्ताह से भी कम समय में, 50-125 मिलियन लोगों को मार सकता है - द्वितीय विश्व युद्ध के पूरे छह वर्षों के दौरान मरने वालों की संख्या से भी अधिक।

सीयू बोल्डर और रटगर्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया नया अध्ययन इस बात की पड़ताल करता है कि इस तरह के काल्पनिक भविष्य के संघर्ष के क्या-क्या परिणाम होंगे जो दुनिया भर में व्याप्त हो सकते हैं। आज, भारत और पाकिस्तान, प्रत्येक के पास अपने निपटारे में लगभग 150 परमाणु हथियार हैं, और यह संख्या 2025 तक बढ़कर 200 से अधिक होने की उम्मीद है। 

तस्वीर विकट है। सीयू बोल्डर के ब्रायन टून ने, जिन्होंने पत्रिका साइंस एडवांस में 2 अक्टूबर को प्रकाशित शोध का नेतृत्व किया, कहा कि युद्ध का यह स्तर केवल स्थानीय रूप से लाखों लोगों को नहीं मारेगा। यह पूरे ग्रह को भीषण ठंड की चपेट में बदल सकता है, संभवतः जो तापमान के साथ पिछले हिम युग के बाद से देखा नहीं गया है। 

उनकी टीम के निष्कर्षों के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से तनाव बढ़ रहा है। अगस्त में, भारत ने अपने संविधान में उस बदलाव को किया, जिसने कश्मीर में लंबे समय से संघर्षरत-क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अधिकार छीन लिए थे । इसके तुरंत बाद, राष्ट्र ने कश्मीर में सेना भेजी, इन चालों की पाकिस्तान ने तीखी आलोचना की। 

 लेबोरेटरी ऑफ़ एटमोस्फियरिक एंड स्पेस फिजिक्स  (LASP) के प्रोफ़ेसर टून ने कहा,"भारत-पाकिस्तान का युद्ध दुनिया भर में सामान्य मृत्यु दर को दोगुना कर सकता है,''। "यह एक ऐसा युद्ध है जिसका मानव अनुभव में कोई उदाहरण नहीं होगा।"

मृतकों की संख्या

यह एक ऐसा विषय है, डिपार्टमेंट ऑफ़ एटमोस्फियरिक एंड ओशनिक साइंस का भी, जो दशकों से टून के  दिमाग में रहा है।

वह शीत युद्ध के दौरान चरम सीमा के उस समय में आया जब स्कूली बच्चे अभी भी अपनी डेस्क के नीचे डकिंग-एंड-कवरिंग का अभ्यास कर रहे थे।1980 के दशक की शुरुआत में एक युवा वायुमंडलीय वैज्ञानिक के रूप में, वह शोधकर्ताओं के उस समूह का हिस्सा थे, जिन्होंने पहली बार "न्यूक्लेअर विंटर" शब्द- अत्यधिक ठंड का वह काल जो संभवतः अमेरिका और रूस के बीच बृहत् पैमाने पर परमाणु बैराज का अनुसरण करेगा- को गढ़ा था।

और सोवियत संघ के पतन के बावजूद, टून का मानना है कि इस तरह के हथियार अभी भी अत्यधिक खतरा बने हुए हैं - भारत और पाकिस्तान के बीच वर्तमान शत्रुता के कारण यह रेखांकित है।

टून ने कहा "वे तेजी से अपने शस्त्रागार का निर्माण कर रहे हैं," "उनके पास विशाल आबादी है, इसलिए बहुत से लोगों को इन शस्त्रागार से खतरा है, और फिर कश्मीर पर अनसुलझे संघर्ष की स्थिति है।"

अपने नवीनतम अध्ययन में, उन्होंने और उनके सहयोगियों ने यह पता लगाने के लिए कि इस तरह का संघर्ष कितना घातक हो सकता है। ऐसा करने के लिए, टीम ने पृथ्वी के वायुमंडल के कंप्यूटर सिमुलेशन से लेकर 1945 के जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में बम विस्फोटों तक कई सबूतों को देखा।

उन विश्लेषणों के आधार पर, तबाही कई चरणों में होगी। समूह बताते हैं कि संघर्ष के पहले हफ्ते में, भारत और पाकिस्तान, संयुक्त रूप से, एक-दूसरे के शहरों में लगभग 250 परमाणु वारहेड का सफलतापूर्वक विस्फोट कर सकते हैं। 

यह जानना बिलकुल भी जरुरी नहीं है कि ये हथियार कितने शक्तिशाली होंगे - राष्ट्र ने दशकों से परमाणु परीक्षण नहीं किया है - लेकिन शोधकर्ताओं का अनुमान है कि हर एक से 700,000 लोग मर सकते हैं।

खाद्य अभाव

हालांकि, उन में से अधिकांश लोग उस विस्फोट से नहीं मरेंगे, लेकिन नियंत्रण से बाहर होने वाली आग से मर जाएंगे।

टून ने कहा, "अगर आप बम गिरने के बाद हिरोशिमा पर नज़र डालें, तो आप लगभग एक मील चौड़े मलबे के विशालकाय क्षेत्र को देख सकते हैं।" “जो बम का नहीं उससे निकलने वाली आग का परिणाम था। ”

बाकी दुनिया के लिए, आग सिर्फ शुरुआत होगी।

शोधकर्ताओं ने गणना की कि भारत-पाकिस्तान युद्ध पृथ्वी के वायुमंडल में 80 बिलियन पाउंड जितने मोटे,  काले धुएं का इंजेक्शन लगा सकता है। यह धुआं सूरज की रोशनी को जमीन तक पहुंचने से रोक देगा, जिससे दुनिया भर में कई सालों तक औसतन 3.5-9 डिग्री फ़ारेनहाइट के तापमान में गिरावट आएगी। जल्द ही  दुनिया भर में भोजन की कमी आने की संभावना है।  

एटमोस्फियरिक एंड ओशनिक साइंस के एक सहयोगी प्रोफेसर और इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कटिक एंड अल्पाइन रिसर्च (INSTAAR) के फेलो अध्ययन सहलेख़क निकोल लोवेन्डूस्की ने कहा कि "अत्याधुनिक अर्थ सिस्टम मॉडल में किए गए हमारे प्रयोग से मनुष्यों सहित खाद्य श्रृंखला में उच्चतर जीवों के लिए खतरनाक परिणामों के साथ, भूमि पर पौधों की और समुद्र में शैवाल की उत्पादकता में बड़े पैमाने पर कमी का पता चलता है"।

टून पहचानते हैं कि इस तरह के युद्ध से लोगों को अपना सिर ढंकना भी मुश्किल हो सकता है। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि ये अध्ययन दुनिया भर के लोगों को दिखाएंगे कि शीत युद्ध की समाप्ति ने वैश्विक परमाणु युद्ध के जोखिम को खत्म नहीं किया था। 

"उम्मीद है, पाकिस्तान और भारत इस पत्र पर ध्यान देंगे," उन्होंने कहा। "लेकिन अधिकतर, मुझे चिंता होती है कि अमेरिकियों को परमाणु युद्ध के परिणामों के बारे में सूचित नहीं किया गया है।"

*डैनियल स्ट्रेन विज्ञान के एक लेखक हैं, जिन्होंने आर्कटिक तटरेखा के ढहने से लेकर वाइन घूमने की भौतिकी तक सब कुछ शामिल किया है। यह लेख पहली बार  कोलोराडो विश्वविद्यालय के बोल्डर की वेबसाइट पर दिखाई दिया।  अंतरिक्ष विज्ञान, भौतिकी, इंजीनियरिंग, भूविज्ञान, नृपविज्ञान, शिक्षा और आउटरीच एंड इंगेजमेंट की कहानियों को लेकर उनसे संपर्क किया जा सकता है। उनसे This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. [IDN-InDepthNews - 5 अक्टूबर 2019] से संपर्क किया जा सकता है

तस्वीर: भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध के बाद दूसरे वर्ष में दुनिया भर के पारिस्थितिक तंत्र की उत्पादकता में बदलाव को दर्शाता एक नक्शा। भूरे रंग के क्षेत्र पौधों की वृद्धि में तेजी से गिरावट का अनुभव कराएंगे जबकि हरे रंग के क्षेत्र बढ़े हुए देखे जा सकते हैं। (क्रेडिट: निकोल लोवेन्डूस्की और लिली ज़िया)। स्रोत: कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय